सामान्यतः सैर सपाटे, और छुट्टियां बिताने का जब कभी मन में विचार आता है तो हमारी कल्पनाओं में हिल स्टेशन और व्यवस्थित रूप से विकसित हो चुके व्यवसायिक पर्यटन स्थलों में जाने का विचार मन मे आता है। दिया तले अंधेरे की कहावत उस समय चरितार्थ होते हुए नजर आती है जब हम बिलासपुर से
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आजकल के आधुनिक लाइफस्टाइल में बढ़ते प्रदूषण और अनहेल्दी खानपान के कारण ही हर दूसरे या तीसरे आदमी की आंखों पर चश्मा लगा दिखाई देता है यहाँ तक कि आजकल छोटे-छोटे बच्चे भी चश्मा लगाए हुए दिख जाते  हैं। इसका सबसे बड़ा कारण अनियमित आहार जिसके कारण शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते
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” रक्तदान ” के समय सावधानियां —  रक्तदान से पहले – 1. हल्का नाश्ता करें । भरपेट भोजन के एक घंटे बाद ही रक्तदान करें। 2. दो ग्लास पानी पीकर ही रक्तदान के लिये लेटें । 3. कपड़े बिल्कुल कम, ढीले, हवादार ही पहन कर जायें। 4. रात को कम से कम 4-5 घंटे की
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हम आहार-विहार संबंधी इन सभी बातों का घ्यान रखते हैं तो ग्रीष्म ऋतु में हम न केवल स्वयं को स्वस्थ रख सकतें हैं बल्कि रोग उत्पन्न होने पर उन्हे बिना किसी औषध के ठीक भी कर सकते हैं।  खाली पेट घर से बाहर न निकलें।  घर से बाहर निकलते समय मुँह पर कपड़ा
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‘ऋतु‘ शब्द काल विभाग की ओर संकेत करता है। इसी आधार पर आचार्यो ने पूरे वर्ष को छः ऋतुओं के अंतर्गत समाहित किया है।आयुर्वेदाचार्यो ने इन ऋतुओं को दो भागों में बाँटा है। 1. विसर्गकाल वर्षा (जिसमें लगभग 15जुलाई-15सितंबर तक समय ) शरद ( जिसमें लगभग 15सितंबर-15नवंबर तक समय ) हेमन्त ( जिसमें लगभग 15नवंबर-15जनवरी
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कूलर गर्मी के मौसम में घरों में ठंडक देने के लिए सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली चीज है पर आपने गौर किया होगा कि अक्सर कूलर पुराने होने के बाद नए जैसी ठंडक नहीं दे पाते इसके लिए कुछ आसान उपाय बताए जा रहे हैं जिनका उपयोग करने से आपका पुराना कूलर भी नहीं जैसी
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लू लगने के कारण,लक्षण एवं चिकित्सा लू क्या है? शरीर का निष्चित तापमान 98.4 डिग्री फायरेनहाइट रहना जरूरी है यह उष्मा हमारे शरीर में चयापचय क्रिया द्वारा पैदा होती है वातावरण के तापमान का प्रभाव भी शरीर पर पड़ता है। यदि शरीर का तापमान कम एवं वातावरण का ज्यादा रहता है तो शरीर वातावरण की गर्मी
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बिलासपुर से ६४ कि. मी दूरी पर महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के संगम तट पर शिवरी नारायण स्थित है। शिवरी नारायण रायपुर-बलौदाबाजार से १२० कि. मी.और जांजगीर जिला मुख्यालय से ६० कि. मी. दूर है। मान्यता है कि वनवास काल में भगवान श्री राम और लक्ष्मण जी को इसी स्थल पर शबरी ने बेर खिलाये थे अत: शबरी के नाम
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